Cheque bounce क्या है और Section 138 में क्या सजा है?

चेक बाउंस होना सिर्फ बैंक की गड़बड़ी नहीं, कई बार यह अपराध बन जाता है। आसान भाषा में समझिए कि चेक बाउंस कब केस बनता है, सजा कितनी है और दोनों पक्षों को क्या करना चाहिए।

सीधा जवाब

जब बैंक आपका दिया हुआ चेक खाते में पैसे कम होने जैसी वजह से बिना भुगतान लौटा देता है, उसे cheque bounce कहते हैं। अगर चेक किसी कर्ज़ या देनदारी के लिए दिया गया था और नोटिस के 15 दिन में भी पैसा नहीं चुकाया गया, तो Section 138 NI Act में 2 साल तक की जेल या चेक राशि का दोगुना जुर्माना हो सकता है।

मुख्य बातें

  • हर चेक बाउंस अपराध नहीं; कर्ज़ या देनदारी के लिए दिया चेक हो तभी Section 138 लगता है।
  • चेक लौटने के 30 दिन में लिखित नोटिस, फिर 15 दिन भुगतान का समय, फिर एक महीने में केस।
  • सजा: 2 साल तक जेल, चेक राशि का दोगुना तक जुर्माना, या दोनों।
  • यह जमानती अपराध है और दोनों पक्ष किसी भी स्टेज पर समझौता कर सकते हैं।

Cheque bounce का मतलब क्या है?

जब आप किसी को चेक देते हैं और वह उसे बैंक में जमा करता है, तो बैंक आपके खाते से पैसा देता है। अगर खाते में पैसे कम हों या कोई और कारण हो, तो बैंक चेक बिना भुगतान के लौटा देता है और साथ में एक return memo (चेक वापसी पर्ची) देता है जिसमें कारण लिखा होता है। इसी को आम बोलचाल में "cheque bounce" या कानूनी भाषा में "dishonour of cheque" कहते हैं।

चेक बाउंस होने पर बैंक दोनों पक्षों से कुछ शुल्क भी काटता है। लेकिन असली असर तब होता है जब चेक किसी उधार, बकाया बिल, किराए या किसी दूसरी देनदारी के बदले दिया गया हो। तब यह मामला Negotiable Instruments Act, 1881 की Section 138 के तहत आपराधिक केस बन सकता है।

Cheque bounce कैसे होता है? आम कारण

बैंक का कारणमतलबक्या Section 138 लग सकता है?
Funds insufficientखाते में पैसा कम हैहाँ, यही सबसे आम मामला है
Exceeds arrangementओवरड्राफ्ट या तय सीमा से ज़्यादा राशिहाँ
Payment stopped by drawerचेक देने वाले ने भुगतान रुकवायाअक्सर हाँ, अगर असली मकसद देनदारी से बचना था
Account closedखाता बंद हो चुका हैअदालतें आमतौर पर इसे भी 138 में मानती हैं
Signature mismatch, overwriting, तारीख गलततकनीकी गलतीतथ्य पर निर्भर; सिर्फ तकनीकी गलती हो तो दोबारा सही चेक लिया जा सकता है

अगर चेक तीन महीने की वैधता के बाद जमा किया गया, या तोहफ़े या दान के तौर पर दिया गया था, तो Section 138 लागू नहीं होगी।

Section 138 kya hai in Hindi

Section 138 कहती है कि अगर किसी व्यक्ति ने अपने खाते का चेक किसी कानूनी रूप से वसूलने योग्य कर्ज़ या देनदारी के लिए दिया, और वह पैसे की कमी के कारण बाउंस हो गया, और लिखित नोटिस मिलने के बाद भी उसने 15 दिन में भुगतान नहीं किया, तो यह अपराध है।

कानून चेक पाने वाले के पक्ष में एक अनुमान (presumption) भी रखता है: अदालत मानकर चलती है कि चेक किसी देनदारी के लिए ही दिया गया था। अब यह साबित करने की ज़िम्मेदारी चेक देने वाले की होती है कि कोई कर्ज़ नहीं था। इसी वजह से चेक बाउंस केस वसूली का मज़बूत तरीका माना जाता है।

अगर चेक किसी कंपनी का था, तो Section 141 के तहत कंपनी के साथ वे डायरेक्टर या अधिकारी भी आरोपी बन सकते हैं जो उस समय कंपनी का कामकाज संभाल रहे थे।

Cheque bounce ki saja kya hai?

  • जेल: अधिकतम 2 साल तक।
  • जुर्माना: चेक राशि के दोगुने तक।
  • या दोनों।

व्यवहार में अदालतें अक्सर शिकायतकर्ता को पैसा दिलाने पर ज़ोर देती हैं, यानी चेक की राशि के साथ मुआवज़ा देने का आदेश, और न देने पर जेल। कुछ और ज़रूरी बातें:

  • यह जमानती अपराध है, इसलिए आरोपी को आमतौर पर अदालत से आसानी से जमानत मिल जाती है।
  • Section 143A के तहत ट्रायल के दौरान अदालत चेक राशि का 20% तक अंतरिम मुआवज़ा दिलवा सकती है। अगर आरोपी बाद में बरी हो जाए तो यह रकम ब्याज सहित लौटानी पड़ती है।
  • सज़ा के खिलाफ अपील में अदालत जुर्माने या मुआवज़े का कम से कम 20% जमा करवाने को कह सकती है (Section 148)।
  • Section 147 के तहत दोनों पक्ष किसी भी स्टेज पर समझौता करके केस खत्म कर सकते हैं।

Cheque bounce me kya hota hai: पूरी प्रक्रिया

  1. चेक बाउंस: बैंक से return memo लें और मूल चेक संभालकर रखें।
  2. 30 दिन में लिखित नोटिस: memo मिलने के 30 दिन के भीतर चेक देने वाले को वकील के ज़रिए डिमांड नोटिस भेजें, रजिस्टर्ड पोस्ट से और साथ में ईमेल या WhatsApp पर भी।
  3. 15 दिन का इंतज़ार: नोटिस मिलने के बाद सामने वाले के पास भुगतान के लिए 15 दिन होते हैं।
  4. एक महीने में केस: 15 दिन बीतने के बाद एक महीने के अंदर मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दर्ज करें। देरी हो जाए तो ठोस कारण बताकर माफी माँगी जा सकती है।
  5. समन और सुनवाई: कोर्ट आरोपी को समन भेजता है, फिर बयान, जिरह और फैसला होता है।

केस आमतौर पर उस कोर्ट में होता है जहाँ शिकायतकर्ता के बैंक की वह शाखा है जिसमें चेक जमा किया गया था। पूरी कानूनी प्रक्रिया, ज़रूरी दस्तावेज़ और बचाव के तरीके अंग्रेज़ी गाइड cheque bounce case under Section 138 में विस्तार से हैं।

अगर आपके ऊपर चेक बाउंस का केस हुआ है

घबराएँ नहीं, लेकिन नज़रअंदाज़ भी न करें। समन आने पर तारीख पर कोर्ट जाएँ, वरना वारंट जारी हो सकता है।

  • अगर कर्ज़ असली है, तो जल्दी समझौता करना सबसे सस्ता रास्ता है; देर से समझौते पर अदालत ज़्यादा खर्च लगा सकती है।
  • अगर कर्ज़ पहले ही चुका दिया था, या सिक्योरिटी के तौर पर दिया गया खाली चेक गलत राशि भरकर लगाया गया, तो बैंक स्टेटमेंट, रसीदें और मैसेज से यह साबित करें।
  • नोटिस देर से आया हो या केस समय-सीमा के बाद दायर हुआ हो, तो यह भी बचाव का आधार है।

अगर चेक बाउंस के साथ झूठे मुकदमे भी लगाए जा रहे हैं, तो झूठे केस से निपटने की गाइड देखें।

जब चेक देने वाला मिल ही न रहा हो

बहुत से केस इसलिए सालों खिंचते हैं क्योंकि आरोपी पता बदल लेता है और समन उस तक पहुँचता ही नहीं। अदालत स्पीड पोस्ट, कूरियर, ईमेल और कई जगह WhatsApp से भी समन भेजने की अनुमति देती है, और बार-बार गैरहाज़िर रहने पर वारंट और फरारी की उद्घोषणा तक हो सकती है। लेकिन इसके लिए सही, मौजूदा पता शिकायतकर्ता को ही बताना होता है।

किसी का मौजूदा पता कानूनी तरीके से कैसे पता करें, यह summons not served गाइड में समझाया गया है। Hire Your Detective पर verified प्राइवेट जासूस सार्वजनिक रिकॉर्ड और फील्ड जाँच से यह काम कानून के दायरे में करते हैं; वे कॉल रिकॉर्ड या बैंक डिटेल नहीं निकालते, क्योंकि यह गैरकानूनी है।

निष्कर्ष

Cheque bounce तभी अपराध बनता है जब चेक किसी देनदारी के लिए दिया गया हो और नोटिस के बाद भी भुगतान न हो। चेक पाने वाले के लिए सबसे ज़रूरी है 30 दिन, 15 दिन और एक महीने की समय-सीमा; चेक देने वाले के लिए सबसे समझदारी है समन को गंभीरता से लेना। बड़ी रकम या कई चेक हों तो पैसा वसूली के दूसरे कानूनी रास्ते भी साथ में अपनाए जा सकते हैं।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। अपने मामले के लिए किसी वकील से सलाह लें। आपात स्थिति में 112 पर कॉल करें।

FAQ

सवाल और जवाब

क्या चेक बाउंस होने पर सीधे पुलिस में FIR होती है?

नहीं। Section 138 का केस पुलिस FIR से नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट कोर्ट में लिखित शिकायत (complaint case) से शुरू होता है। पुलिस आमतौर पर इसमें शामिल नहीं होती। अगर शुरू से ही धोखा देने की नीयत थी, तो अलग से cheating का केस भी बन सकता है।

चेक बाउंस का नोटिस कौन भेजता है और उसमें क्या लिखा होता है?

नोटिस चेक पाने वाला व्यक्ति, आमतौर पर वकील के ज़रिए भेजता है। उसमें चेक नंबर, तारीख, राशि, बैंक का कारण और 15 दिन में चेक की राशि चुकाने की माँग लिखी होती है। माँगी गई रकम चेक की राशि से मेल खानी चाहिए।

क्या खाली साइन किया हुआ चेक देने पर भी केस हो सकता है?

हाँ, हो सकता है। अदालतों ने माना है कि साइन किया हुआ खाली चेक देने वाला यह मानकर देता है कि उसमें राशि भरी जाएगी। बचाव तभी मज़बूत होता है जब आप साबित कर सकें कि भरी गई राशि असल में बकाया नहीं थी।

चेक बाउंस केस में फैसला आने में कितना समय लगता है?

कानून के अनुसार ऐसे केस छह महीने में निपटाने की कोशिश होनी चाहिए, लेकिन असल में यह शहर और कोर्ट के बोझ पर निर्भर करता है और एक से कई साल तक लग सकते हैं। समन जल्दी तामील होना और समझौते की कोशिश समय काफी घटा सकती है।

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